लोग सबसे पहले ये पूछते हैं
हम कैसे काम करते हैं, कितना खर्च होता है और हम क्या करते हैं व क्या नहीं, इसके सीधे जवाब।
क्या भारत में प्राइवेट डिटेक्टिव रखना कानूनी है?
हाँ। प्राइवेट जांचकर्ता रखना कानूनी है। जांचकर्ताओं को कानून के दायरे में काम करना होता है: न फ़ोन टैपिंग, न हैकिंग, न अनधिकृत प्रवेश। हमारा हर काम इसी दायरे में होता है।
क्या मेरा मामला गोपनीय रहेगा?
हाँ। आपकी पहचान, आपकी बताई बातें और हमारे निष्कर्ष केवल आपसे, या जिसे आप लिखित में बताएं, उसी से साझा होते हैं।
जांच में कितना खर्च आता है?
यह मामले के प्रकार, जगहों और लगने वाले दिनों पर निर्भर है। छोटी सी बातचीत के बाद काम शुरू होने से पहले हम साफ़ अनुमान देते हैं।
जांच में कितना समय लगता है?
साधारण सत्यापन में कुछ दिन लग सकते हैं; वैवाहिक और निगरानी मामलों में आमतौर पर 7 से 15 दिन। मामला देखने के बाद हम अनुमानित समय बताते हैं।
क्या आप दिल्ली के बाहर काम करते हैं?
हाँ। हमारे दफ़्तर दिल्ली, गुरुग्राम और ज़ीरकपुर में हैं, और ज़रूरत के हिसाब से दूसरे शहरों के मामले भी लेते हैं।
क्या आप लिखित रिपोर्ट देते हैं?
हाँ। हर मामला उसके दायरे के मुताबिक एक व्यवस्थित, गोपनीय रिपोर्ट के साथ पूरा होता है।
शुरुआत कैसे करूँ?
+91 73030 97563 पर कॉल या व्हाट्सऐप करें, या पूछताछ फ़ॉर्म भेजें। संक्षेप में बताइए क्या हुआ, हम विकल्प समझाएंगे।